नमस्कार दोस्तों, आज मैं आपके लिए लाया हूँ एक जबरदस्त भाषण जो आंबेडकर जयंती (Ambedkar jayanti) पर आप बोल सकते है, इस भाषण को छोटा रखा गया है, ताकि हर कोई इसे आसानी से बोल सके.
नमन और अभिवादन:
माननीय मुख्य अतिथि, आदरणीय शिक्षक गण, और मेरे प्यारे देशवासियों… आज का दिन केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि उस चेतना का उत्सव है जिसने करोड़ों दबे-कुचले लोगों को ‘इंसान’ होने का अहसास दिलाया। आज हम उस महामानव का जन्मदिन मना रहे हैं, जिन्हें दुनिया ‘बाबा साहेब’ के नाम से जानती है।
उन्होंने सिखाया कि अगर आपके पास ज्ञान का हथियार है, तो दुनिया की कोई भी दीवार आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। बाबा साहेब ने कहा था— ‘शिक्षा शेरनी का दूध है, जो इसे पिएगा वह दहाड़ेगा।’ और आज उनकी उसी दहाड़ की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देती है।”
अक्सर लोग उन्हें सिर्फ ‘दलितों का मसीहा’ कहकर सीमित कर देते हैं, लेकिन बाबा साहेब का व्यक्तित्व हिमालय जैसा विशाल था।
वे भारत के पहले कानून मंत्री थे।
वे एक विश्वस्तरीय अर्थशास्त्री थे, जिनकी थ्योरी पर ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ (RBI) की नींव रखी गई।
वे महिलाओं के अधिकारों के सबसे बड़े पैरोकार थे, जिन्होंने ‘हिंदू कोड बिल’ के जरिए महिलाओं को संपत्ति और बराबरी का हक दिलाने के लिए अपनी मंत्री पद की कुर्सी तक दांव पर लगा दी थी।”
जब हमारा देश आजाद हुआ, तो सबसे बड़ी चुनौती थी—इतने विविधताओं वाले देश को एक सूत्र में पिरोना। बाबा साहेब ने दुनिया के सबसे बेहतरीन संविधान की रचना की। उन्होंने हमें वह ‘वोट की ताकत’ दी, जिसने राजा के महल और गरीब की झोपड़ी, दोनों की कीमत बराबर कर दी।
आज हम जो भी हैं, जहाँ भी हैं, भारत के उस पवित्र ग्रंथ ‘संविधान’ की वजह से हैं, जिसके मुख्य शिल्पकार बाबा साहेब थे।
मेरे भाइयों और बहनों, बाबा साहेब को याद करने का मतलब सिर्फ उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाना नहीं है। उन्हें याद करने का असली मतलब है—उनके बताए हुए तीन शब्दों को जीवन में उतारना:
- शिक्षित बनो (Educate)
- संगठित रहो (Organize)
- संघर्ष करो (Agitate)
उन्होंने कभी नहीं कहा कि किसी से नफरत करो। उन्होंने सिखाया कि अन्याय को सहना, अन्याय करने से भी बड़ा पाप है। उन्होंने हमें ‘समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व’ (Equality, Liberty, and Fraternity) का मार्ग दिखाया।
अंत में, मैं बस इतना ही कहूँगा कि सूरज चाहे कितना भी तेज क्यों न हो, वह समंदर को नहीं सुखा सकता। उसी तरह, वक्त की धूल बाबा साहेब के विचारों को कभी धुंधला नहीं कर सकती।
“जब तक सूरज-चाँद रहेगा, बाबा साहेब आपका नाम रहेगा!
जय भीम! जय हिंद! जय भारत!




