दोस्तों आज आपके सामने लेकर आया हूँ, सरहुल महोत्सव की एंकरिंग स्क्रिप्ट ( Sarhul Anchoring Script ), ये स्क्रिप्ट आपको एक सुन्दर रुपरेखा तैयार करके देगी, मैंने ये अपने हिसाब से लिखी है क्योकि मुझे ज्यादा जानकारी नहीं हैं इस पर्व की, लेकिन मुझे यकीन हैं की इसमें कुछ और चाहिए तो आप अपने हिसाब से जोड़ सकते है, हमें किसीने कहा था मेसेज करके की आप इस्पे एक स्क्रिप्ट लिखे, तो आपकी फरमाइश पे पेश है ये सरहुल महोत्सव स्क्रिप्ट, चलिए आगे बढ़ते हैं.
सरहुल कार्यक्रम की भव्य शुरुआत
नमस्कार! जोहार! सत श्री अकाल! आदाब!
आज का यह शुभ दिन, यह खूबसूरत शाम और आप सभी का यहाँ इतनी उत्सुकता से आना… यह सब कुछ मिलकर इस आयोजन को और भी खास बना देता है।
मैं [आपका नाम], आपका एंकर, आपका होस्ट, आपका अपना दोस्त, आप सभी का इस भव्य सरहुल महोत्सव में तहे दिल से स्वागत करता हूँ!
आज हम सब यहाँ एकत्र हुए हैं, न सिर्फ एक त्योहार मनाने के लिए, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने के लिए।
तो तैयार हो जाइए इस रंगारंग सांस्कृतिक संध्या के लिए, जहाँ होगा झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम!
सरहुल महोत्सव का महत्व
सरहुल, सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने का पर्व है।
यह वह पर्व है जब धरती माँ हमें नए जीवन और हरियाली का उपहार देती है।
चैत्र महीने में जब साल के वृक्ष पर नई कोपलें आती हैं, तब हमारे आदिवासी भाई-बहन इसे “प्रकृति पर्व” के रूप में मनाते हैं।
इस दिन वन देवता की पूजा की जाती है।
समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर नृत्य-संगीत का आनंद लेते हैं।
यह हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ तालमेल ही हमारी असली शक्ति है।
तो आइए, इस पर्व को और खास बनाते हैं, तालियों के साथ अपनी संस्कृति का सम्मान करते हैं!
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत
और अब, दोस्तों!
क्या आप तैयार हैं झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करने के लिए?
क्या आप देखना चाहते हैं वह अद्भुत नृत्य जो इस भूमि की आत्मा को दर्शाता है?
तो स्वागत कीजिए, हमारे आदिवासी कलाकारों का, जो लेकर आ रहे हैं एक बेहतरीन पारंपरिक नृत्य प्रस्तुति!
दर्शकों को उत्साहित करें “जोश दिखाइए दोस्तों! ज़ोरदार तालियों के साथ…
संगीत बजता है, नर्तक मंच पर आते हैं…
प्रस्तुति के बाद प्रतिक्रिया
वाह! अद्भुत! शानदार!
मित्रों, सच में, इस नृत्य ने हमें झारखंड की आत्मा से जोड़ दिया!
यह नृत्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान है, हमारी परंपरा की झलक है।
कितने लोगों को यह प्रस्तुति पसंद आई?
(हाथ उठवाइए, तालियों की गूंज को महसूस कीजिए!)
बहुत बढ़िया! ऐसा ही जोश बनाए रखिए क्योंकि आगे भी हमारे पास आपके लिए कई शानदार प्रस्तुतियाँ हैं।
पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का संदेश
सरहुल सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि यह हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है
हमारे पेड़, हमारे जंगल, हमारी नदियाँ… यही हमारी असली विरासत हैं!
दोस्तों, अगर हमें अपनी धरती को हरा-भरा बनाए रखना है, तो हम सभी को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
आइए, हम सभी मिलकर एक संकल्प लें
✅ हम पेड़ लगाएंगे!
✅ हम पानी बचाएँगे!
✅ हम प्रकृति से प्रेम करेंगे!
तो क्या आप सब तैयार हैं इस संकल्प को निभाने के लिए?
(दर्शकों से ‘हाँ’ बुलवाएँ, उनका उत्साह बढ़ाएँ!)
समापन (धन्यवाद और विदाई)
हर शुरुआत का एक अंत होता है, लेकिन यह अंत एक नई प्रेरणा के साथ है।
आज का यह सरहुल महोत्सव हमें हमारी संस्कृति, हमारी परंपराओं और हमारी प्रकृति से जोड़ने का एक खूबसूरत जरिया बना।
आप सभी ने इस कार्यक्रम को अपनी उपस्थिति और उत्साह से और भी खास बना दिया।
इसके लिए मैं, [आपका नाम], आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
अंत में, झारखंड की इस पावन धरती को नमन करते हुए, मैं बस यही कहूँगा—
💚 “हरियाली ही खुशहाली है!”
🌿 “प्रकृति है, तो हम हैं!”
जय हिंद! जय झारखंड! जय प्रकृति!
तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मंच से विदाई लें!